Vineetchhajer

Dreamer in me.. Seeking Answers!! Believer in me.. Finding them!! :)

ख़्वाबों के कारवां by Lalit Kundalia!

on March 15, 2012

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उनकी यादों की कशमकश में उलझे थे हम
जब सवेरा होने को था
पलकें खुली तो यह एहसास हुआ की
उनका वजूद सिर्फ हमारे ख्वाबों में था

जब दीदार उनका करते हे बंद आँखों से
तो खुद को महफूज़ पाते हे इस दुनिया से
सुकून मिलता है इस नादान दिल को
जब रूबरू उनसे होते है खुदा की रहमत से

न जाने कब सिमटेगी ये दो जहां की दूरियां
कब ख़त्म होगा ये सिर्फ दो पल का मिलना
मेरे मर्ज़ में हो तो एक कर दूं दो जहां ये
या हमेशा के लिए हो जाऊं उस जहाँ का साँसे बन्द करके

लोग कहते हैं टूट जाते हैं सपने ज़िन्दगी में अक्सर
फिर भी ये ज़िन्दगी चलती रहती है
पर हम कैसे टूटने दे अपने सपनो को
हमारी तो ज़िन्दगी ही सपनो में बस्ती हैं…..

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3 responses to “ख़्वाबों के कारवां by Lalit Kundalia!

  1. live4life201 says:

    Reblogged this on live4life201 and commented:
    Have know idea what ur saying but I love the art work.

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