Vineetchhajer

Dreamer in me.. Seeking Answers!! Believer in me.. Finding them!! :)

काश…

 

 

 

 

 

 

 

काश फिर मिलने की वजह मिल जाए
साथ बिताये वो खट्टे मीठे पल मिल जाए
दर्स आपका हो ख्वाब मेरे…
जिस तरह चाहु.. उस तरह आप मिल जाए !!

बेवजह हम बात करें
फिर से वह रूठना मनाना मिल जाए
आओ हाथ में हाथ कही दूर चले जाए
पीछे मुढ़ के न देखे
मदहोशी में खो जाए!!

चलो अपनी आँखें बंद कर ले..
बंद आँखों से एक नयी दुनिया देखें
क्या पता ख्वाबों में..
गुजरी हुई यादों का समुन्दर मिल जाए!!

Poem concieved and developed on the basis of an BBM shayari recieved from a Friend!

Advertisements
2 Comments »

बेहता पानी निर्मला by Lalit Kundalia!!

 

 

 

 

 

 

तन्हाई में दिन काटे हे, में खून के अश्रु रोया हूँ
खुली आँखों से न जाने में कितनी रातों को सोया हूँ

सवेरा होते ही सोचता था, न जाने कैसे कटेगा ये दिन?
एक ही सवाल था जेहान में, क्या कट जाएगी ये ज़िन्दगी तेरे बिन?

फिर जाग उठा इंसान वो, था छिपा जो कहीं मेरे ही अन्दर
और जाना मैंने की ज़िन्दगी तो हैं एक गेहेरा समंदर

अब न डरना है न झुकना है
मंजिल को पाने से पहले मुझे नहीं रुकना है

इस ज़िन्दगी का एक सच अब मैंने हैं जाना
बेहता पानी निर्मला, और मुझे बेहते हैं जाना…!

Leave a comment »

अक्स by Lalit Kundalia!

 

 

 

 

 

 

 

 

टूट चुका था सदियों पेहले, तुझसे वो रिश्ता मेरा
बंद आँखों में ना जाने फिर भी क्यूँ नज़र आता हैं चेहरा तेरा

तेरी आहटों के साथ बितायी हैं ये ज़िन्दगी मैंने
अनगिनत आँसु दिए हैं मैंने अपने अश्रु से बेहने

कोई महसूस नहीं कर सकता, दिया है तुमने जो ज़ख्म ये गेहरा
आज भी जिंदा हैं कहीं मुझमे छिपा अक्स वो तेरा 

तेरी यादों ने बरपाया हैं मुझपे वो कहर
मीठी थी जो ज़िन्दगी कभी, अब लगती हे ज़हर

पर अब नहीं है उन रास्तों से मेरा कोई वास्ता
अब अलग हे मंजिल मेरी, अलग हे मेरा रास्ता

तनहाइयों की इन बेड़ियों को में अब तोड़ दूंगा
गुमनामी के इस मंज़र से में अपना मूह मोड़ लूँगा

अब एक ही लक्ष्य हैं जीवन का, की ऊँचाइयों को पाना हैं…
नामुमकिन कुछ भी नहीं, ये साबित कर दिखाना हैं….!

2 Comments »