Vineetchhajer

Dreamer in me.. Seeking Answers!! Believer in me.. Finding them!! :)

“रुबाब”

ज़िक्र तुम्हारा हुआ और मेरे लबों पे मुस्कराहट को तोः आना ही था..
बेपर्दाह हुए दबे जज़्बात, आँखों से रुबाब को छलकाना ही था!!

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“गुफ्तगू”

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फिर गुफ्तगू करने निकले हम दिल-ए-वफ़ा से..
कितने नज़्म जुड़े और टूटे इस तफ्सील के दरमियान,
शायद यही है खुमार इस्तकबाल के…
की रूह अपनी राह चले भूलके बेफ़िक्रियां,
मौसिकी उसी की है जो क़ुरबत मैं प्यार रखे..
फिर पैमाने की जुस्तजू में चाहे केहर मिले या आशना!!

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“वक़्त”

वक़्त के दिए सितम तो हम थक हार कर सेह भी लेते…
मुक़द्दर बदलने कि ख्वाहिश ने कम्बख्त मेरे “वक़्त” को ही बदल दिया!!

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“हम”

हर मर्ज़ को दवा नहीं मिलती
हर शख्स को वफ़ा नहीं मिलती
बस जागते है हर सुबह ये सोच कर
कि कब वोह और हम “हम” होंगे …

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काश…

 

 

 

 

 

 

 

काश फिर मिलने की वजह मिल जाए
साथ बिताये वो खट्टे मीठे पल मिल जाए
दर्स आपका हो ख्वाब मेरे…
जिस तरह चाहु.. उस तरह आप मिल जाए !!

बेवजह हम बात करें
फिर से वह रूठना मनाना मिल जाए
आओ हाथ में हाथ कही दूर चले जाए
पीछे मुढ़ के न देखे
मदहोशी में खो जाए!!

चलो अपनी आँखें बंद कर ले..
बंद आँखों से एक नयी दुनिया देखें
क्या पता ख्वाबों में..
गुजरी हुई यादों का समुन्दर मिल जाए!!

Poem concieved and developed on the basis of an BBM shayari recieved from a Friend!

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“Maa”- Taare Zameen Par

One of My all time Favourite Track, Beautifully Penned by Prasoon Joshi & Sung so Beautifully by Shankar Mahadevan!! One of the Very Few Tracks that brought a Tear in my eye.. Kudos to Aamir Khan!!

Happy Mother’s Day to All the Lovely Mother’s across the World including the Best Mom in this World- MY MOM!!

 

Main Kabhi Batlata Nahin
Par Andhere Se Darta Hoon Main Maa
Yun To Main,Dikhlata Nahin
Teri Parwaah Karta Hoon Main Maa
Tujhe Sab Hain Pata, Hain Na Maa
Tujhe Sab Hain Pata,,Meri Maa

Bheed Mein Yun Na Chodo Mujhe
Ghar Laut Ke Bhi Aa Naa Paoon Maa
Bhej Na Itna Door Mujkko Tu
Yaad Bhi Tujhko Aa Naa Paoon Maa
Kya Itna Bura Hoon Main Maa
Kya Itna Bura Meri Maa

Jab Bhi Kabhi Papa Mujhe
Jo Zor Se Jhoola Jhulate Hain Maa
Meri Nazar Dhoondhe Tujhe
Sochu Yahi Tu Aa Ke Thaamegi Maa

Unse Main Yeh Kehta Nahin
Par Main Seham Jaata Hoon Maa
Chehre Pe Aana Deta Nahin
Dil Hi Dil Mein Ghabraata Hoon Maa
Tujhe Sab Hai Pata Hai Naa Maa
Tujhe Sab Hai Pata Meri Maa

Main Kabhi Batlata Nahin
Par Andhere Se Darta Hoon Main Maa
Yun To Main,Dikhlata Nahin
Teri Parwaah Karta Hoon Main Maa
Tujhe Sab Hain Pata, Hain Na Maa
Tujhe Sab Hain Pata,,Meri Maa

“I’ve never told you
How scared I am of the dark
I’ve never told you
How much I care for you
But you know, don’t you Mom?
You know everything, my Mom.

Don’t leave me alone in crowds
I’ll lose my way back home
Don’t send me to places far away
Where you won’t even remember me
Am I so bad, Mom?
Am I so bad, my Mom?”

When sometimes Papa swings me
Too high in the air,
My eyes search for you, hoping
You’ll come and hold me safe

I don’t tell him
But I get petrified
I don’t let it show
But my heart sinks
You know everything, don’t you mom?
You know everything, my Mom

I’ve never told you
How scared I am of the dark
How much I care for you
But you know, don’t you, Mom?
You know everything, my Mom.

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ख्वाब… My Dream!!

 

 

 

 

 

 

एक ख्वाब देखा….
खाव्बों का सिलसिला सा चल पड़ा
चुनिन्दा कुछ याद है
बाकी सब धूमिल सा रह गया

स्वप्न की दुनिया भी बड़ी अजीब है
अच्छा लगे तो हर इंसान उनका मुरीद है
डर लगे तो यह हाल हो जाता है
आँख बंद करने से पहले ही एक खौफ्फ़ सा छा जाता है

कल रात का यह किस्सा है
तुम्हारे मेरे बीच का जो रिश्ता है
स्वप्न में जब तुम आये थे
ख़ुशी चेहरे पे ही नहीं आँखों में भी छलक आई थी

बेहद खूबसूरत थे वो पल जो हमनें कभी बिताए ही नहीं
वहां सिर्फ में था, तुम थे, पर कोई तन्हाई नहीं
रुक जाओ दो पल यहीं मेरे पास में
तुम्हे देख कर चैन आता है हर सांस में

लोग गहरी निंद्रा में सोते हैं तरोताज़ा होने के लिए
हम तो आजकल सोते हैं केवल आपसे रूबरू होने के लिए
कौन कमबख्त सोना चाहता अगर आप आमने सामने होते
फिर हम आँखें खुली रख के आपके संग का एक पल न खोते…

 

 

 

 

 

 

I saw a Dream..

What followed was a Plethora of it, it seems

I remember vividly a select few though

Rest everything is just Hazy & Hollow

 

The World of Dreams is Weird indeed

Love them & we remember fondly everything such is the need

When it scares it torments in such a way

Mere thought of Closing Eyes crucifies us to the bay

 

Shall I tell you Yesternight’s story bit by bit?

The Beauty of our Relationship self explains every little shift

When u came & the Room lit up it seems

Not just my face but in my eyes also it beams

 

Very Beautiful were the times we never actually spent

It was just u, just me but no sadness amen

Rest with me for a Moment without the dutiful timing

Every breath I take in your presence becomes so very refreshing

 

People usually sleep to freshen themselves up

I sleep just so to be with you smiling not wanting to get up

Which fool would have slept if u were in front of him

Wud stare without blinking just to see you, for you are my mystical sin!

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ख़्वाबों के कारवां by Lalit Kundalia!

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उनकी यादों की कशमकश में उलझे थे हम
जब सवेरा होने को था
पलकें खुली तो यह एहसास हुआ की
उनका वजूद सिर्फ हमारे ख्वाबों में था

जब दीदार उनका करते हे बंद आँखों से
तो खुद को महफूज़ पाते हे इस दुनिया से
सुकून मिलता है इस नादान दिल को
जब रूबरू उनसे होते है खुदा की रहमत से

न जाने कब सिमटेगी ये दो जहां की दूरियां
कब ख़त्म होगा ये सिर्फ दो पल का मिलना
मेरे मर्ज़ में हो तो एक कर दूं दो जहां ये
या हमेशा के लिए हो जाऊं उस जहाँ का साँसे बन्द करके

लोग कहते हैं टूट जाते हैं सपने ज़िन्दगी में अक्सर
फिर भी ये ज़िन्दगी चलती रहती है
पर हम कैसे टूटने दे अपने सपनो को
हमारी तो ज़िन्दगी ही सपनो में बस्ती हैं…..

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बेहता पानी निर्मला by Lalit Kundalia!!

 

 

 

 

 

 

तन्हाई में दिन काटे हे, में खून के अश्रु रोया हूँ
खुली आँखों से न जाने में कितनी रातों को सोया हूँ

सवेरा होते ही सोचता था, न जाने कैसे कटेगा ये दिन?
एक ही सवाल था जेहान में, क्या कट जाएगी ये ज़िन्दगी तेरे बिन?

फिर जाग उठा इंसान वो, था छिपा जो कहीं मेरे ही अन्दर
और जाना मैंने की ज़िन्दगी तो हैं एक गेहेरा समंदर

अब न डरना है न झुकना है
मंजिल को पाने से पहले मुझे नहीं रुकना है

इस ज़िन्दगी का एक सच अब मैंने हैं जाना
बेहता पानी निर्मला, और मुझे बेहते हैं जाना…!

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अक्स by Lalit Kundalia!

 

 

 

 

 

 

 

 

टूट चुका था सदियों पेहले, तुझसे वो रिश्ता मेरा
बंद आँखों में ना जाने फिर भी क्यूँ नज़र आता हैं चेहरा तेरा

तेरी आहटों के साथ बितायी हैं ये ज़िन्दगी मैंने
अनगिनत आँसु दिए हैं मैंने अपने अश्रु से बेहने

कोई महसूस नहीं कर सकता, दिया है तुमने जो ज़ख्म ये गेहरा
आज भी जिंदा हैं कहीं मुझमे छिपा अक्स वो तेरा 

तेरी यादों ने बरपाया हैं मुझपे वो कहर
मीठी थी जो ज़िन्दगी कभी, अब लगती हे ज़हर

पर अब नहीं है उन रास्तों से मेरा कोई वास्ता
अब अलग हे मंजिल मेरी, अलग हे मेरा रास्ता

तनहाइयों की इन बेड़ियों को में अब तोड़ दूंगा
गुमनामी के इस मंज़र से में अपना मूह मोड़ लूँगा

अब एक ही लक्ष्य हैं जीवन का, की ऊँचाइयों को पाना हैं…
नामुमकिन कुछ भी नहीं, ये साबित कर दिखाना हैं….!

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